उज्जैन नगर निगम आयुक्त के औचक निरीक्षण के अगले दिन कुछ विभागों में कर्मचारी सीटों से गायब मिले।

Ujjain News: उज्जैन नगर निगम में कर्मचारियों की समय पर मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने मंगलवार को कार्यालयीन समय में निगम मुख्यालय का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों और कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद अगले ही दिन कुछ विभागों में निरीक्षण के दौरान अधिकारी-कर्मचारी अपनी सीटों पर मौजूद नहीं मिले।
बुधवार सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच निगम मुख्यालय के अलग-अलग विभागों में निरीक्षण के दौरान कई कुर्सियां खाली मिलीं। खास बात यह रही कि कर्मचारियों की सीटें खाली होने के बावजूद कमरों में पंखे और लाइट चालू मिले।
सुबह करीब 11:13 बजे अपर आयुक्त (वित्त) डॉ. पुनीत शुक्ला के कक्ष का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कमरे में कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। कमरे में पंखे और लाइट चालू थे, लेकिन कर्मचारियों की सीटें खाली नजर आईं।
ट्रेड लाइसेंस शाखा में भी निरीक्षण के दौरान कोई अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं मिला। यहां भी कर्मचारियों की सीटें खाली थीं और पंखे-लाइट चलते हुए मिले। यह स्थिति आयुक्त के एक दिन पहले दिए गए निर्देशों के बाद सामने आई है।
कमरा नंबर 234 स्थित विधि विभाग में करीब 10:45 बजे निरीक्षण के दौरान एक कर्मचारी अपनी सीट पर मौजूद मिला। हालांकि, विभाग की बाकी सीटें खाली थीं। खाली सीटों के ऊपर लगे पंखे और लाइट भी चालू मिले।
निगम में मौजूद कुछ कर्मचारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि कुछ अधिकारी-कर्मचारियों के देर से आने और जल्दी कार्यालय से चले जाने की शिकायतें पहले से हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी या कर्मचारी ने कैमरे के सामने बयान नहीं दिया है।
मामले में निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी किसी दूसरे विभाग में मीटिंग या अन्य जरूरी काम के लिए गए हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर अधिकारी-कर्मचारी मौजूद नहीं मिले, वहां के वीडियो उन्हें भेजे जाएं, ताकि वास्तविक स्थिति की जांच की जा सके।
आयुक्त ने मंगलवार के औचक निरीक्षण में अनुपस्थित मिले कर्मचारियों पर वेतन कटौती और कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई किए जाने की बात भी दोहराई।
आयुक्त के औचक निरीक्षण के अगले दिन ही अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की गैरमौजूदगी सामने आने से निगम की कार्यालयीन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, कर्मचारियों की अनुपस्थिति का वास्तविक कारण क्या था, यह निगम की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।
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