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रूस से कच्चे तेल के आयात में तेजी आने के बीच भारत ने मार्च से मई के दौरान करीब 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान रुपये में किया। आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा आयात में रुपये के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ने के बीच भारत ने मार्च, अप्रैल और मई के दौरान लगभग 15 अरब डॉलर मूल्य के आयात का भुगतान भारतीय रुपये में किया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये के आयात का निपटान रुपये में किया गया।
यह भारत के कुल वस्तु आयात का लगभग 7.1 प्रतिशत हिस्सा है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये में बढ़े भुगतान के पीछे सबसे बड़ी वजह रूस से कच्चे तेल की खरीद में आई तेजी है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने रूस से अधिक मात्रा में तेल आयात किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से बढ़ी खरीद इसका प्रमुख कारण रही।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच केवल 42,506 करोड़ रुपये के आयात का भुगतान भारतीय मुद्रा में किया गया था, जो कुल आयात का लगभग 2.4 प्रतिशत था।
वहीं मार्च से मई के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के पूरे साल के आंकड़ों से भी अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा मार्च में रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर दी गई अस्थायी छूट के बाद भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ा दिया था। बाद में यह छूट कई बार बढ़ाई गई, लेकिन 17 जून के बाद इसका नवीनीकरण नहीं किया गया।
इसके बावजूद भारतीय कंपनियां उन रूसी आपूर्तिकर्ताओं से तेल खरीदती रहीं जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के बढ़ते इस्तेमाल से विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, ऊर्जा आयात जैसे बड़े क्षेत्रों में स्थानीय मुद्रा में भुगतान भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को भी मजबूती दे सकता है।
हालांकि, इसका भविष्य वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्थाओं पर भी निर्भर करेगा।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, वहीं सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहा है।

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