सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट ने राज्यों की राजनीति की सच्चाई बताई है। 28 राज्यों के 14 सीएम और 170 सांसदों पर मुकदमे दर्ज हैं। यूपी में 1171 ट्रायल पेंडिंग हैं, जबकि तेलंगाना के सीएम पर 89 केस हैं।
देश के अलग अलग राज्यों और क्षेत्रीय विधानसभाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बहुत बड़ी रिपोर्ट पेश की गई है, और इसे सुनते ही स्थानीय राजनीति में हड़कंप मच गया है । 28 राज्यों की स्थिति का जायजा लेने पर ये सामने आया कि 14 मौजूदा मुख्यमंत्रियों पर गंभीर तरह के मामले चल रहे हैं । क्षेत्रीय स्तर पर तेलंगाना वाला भाग सबसे ज्यादा चर्चा में है जहां के सीएम ए. रेवंत रेड्डी पर कुल 89 मामले दर्ज हैं।
लोकल नेताओं का जो आंकड़ा है उसमें पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी के नाम 29 मामले हैं। वहीं दक्षिण में कर्नाटक के डीके शिवकुमार और आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू पर 19-19 मुकदमे दर्ज बताए गए हैं । केरल से वी.डी. सतीशन 18 मुकदमों में उलझे हुए हैं। क्षेत्रीय राजनीति के कुछ और कद्दावर चेहरों में झारखंड के हेमंत सोरेन (5), महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस (4) और हिमाचल के सुखविंदर सिंह (4) शामिल हैं । इसके अलावा कई मुख्यमंत्रियों के पास 1-2 केस अब भी लंबित हैं, ऐसा कहा जा रहा है।
राज्य विधानसभाओं की हालत भी कुछ खास ठीक नहीं दिखती । पश्चिम बंगाल विधानसभा में 292 सीटें हैं, इनमें 170 विधायक गंभीर मामलों में फंसे बताए गए हैं। केरल विधानसभा के 57%, आंध्र प्रदेश के 56% और तेलंगाना के करीब 49% विधायक दागी हैं। बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा की क्षेत्रीय राजनीति भी ऐसे विधायकों की वजह से दबाव में नजर आती है ।
केंद्र स्तर पर लोकसभा के 543 में से 170 सांसदों (31%) पर गंभीर केस बताए गए हैं, खासकर तेलंगाना, केरल और बिहार से । राज्यसभा की बात करें तो 233 सदस्यों में से 75 दागी हैं, और इनमें 40 अति गंभीर श्रेणी में आते हैं।
जुलाई 2026 के अपडेट के मुताबिक, देशभर के पूर्व और वर्तमान माननीयों पर 4,192 मामले ट्रायल स्टेज पर रखे हुए हैं । क्षेत्रीय हिसाब से उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां स्थानीय अदालतों में 1,171 मामले अटके हैं । इन मुकदमों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अदालतें बनवाने और क्षेत्रीय हाईकोर्ट्स की निगरानी बढ़ाने की बात उठी है। फिर भी जनता को ये भी समझना होगा कि जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आता, केवल केस दर्ज हो जाने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं होता ।
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