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अपने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दी हैं, लेकिन 2873 दागी लोगों पर पुलिस का शिकंजा कसा रहेगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बहुत बड़ा फैसला सुनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सभी एफआईआर को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस बड़े फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई खास शक्तियों का इस्तेमाल किया है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के मुताबिक, अपनी दिल्ली में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस का मुकदमा जारी रहेगा।
नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में अपने दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 एफआईआर रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की। यह मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने रखी थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की परमिशन भी अदालत से मांगी है।
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए इस भारी विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ एफआईआर पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर बढ़ाने की इजाजत मिली है उनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने भी कहा है कि आम तौर पर कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। पुलिस ने कोर्ट से यह भी कहा है कि उसका यह फैसला सिर्फ इसी मामले की परिस्थितियों तक ही सीमित रहे और भविष्य के मामलों में इसे कोई मिसाल न माना जाए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र (अपनी दिल्ली पुलिस) के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने भी छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर दिए हैं। सरकारों ने अदालत को यह पक्का आश्वासन भी दिया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई भी नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
आज की सुनवाई से पहले ही कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने का फैसला कर लिया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव ने बताया कि केंद्र ने उनकी मांगों को पूरा करने का पक्का आश्वासन दे दिया है। इसी दौरान, दास ने मामले में दोनों पक्षों के वकीलों और अदालत की ओर से किए गए सभी प्रयासों के लिए उन्हें दिल से धन्यवाद भी दिया।
सीजेआई (CJI) ने एक बहुत जरूरी बात कहते हुए कहा कि जहां तक नीट परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी। उन्होंने कहा कि इस नीति को 3 महीने में पूरा कर हर हाल में मुआवजा दिया जाए।
सीजेपी के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सद्भावना के साथ काम करें तो सभी मुद्दों को एक-एक कर सुलझाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे खुले मन से चर्चा के जरिए हल न किया जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि दोनों पक्षों ने रचनात्मक तरीके से काम किया और एक-दूसरे को कभी दुश्मन की नजर से नहीं देखा।
आपको याद दिला दें कि 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में अपने दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी झड़प हुई थी। जब भीड़ संसद की ओर बढ़ रही थी, तो उसे रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का भारी इस्तेमाल किया था।
इसके बाद छात्रों का यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर देश के कई शहरों तक फैल गया। उनकी सबसे मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था।
यह पूरा आंदोलन 20 जून को अपने जंतर-मंतर से ही शुरू हुआ था। आखिरकार, प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से सीजेपी की बाकी मांगें मान लिए जाने के बाद 25 जुलाई को यह आंदोलन पूरी तरह खत्म कर दिया गया था।
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