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संसद के मानसून सत्र 2026 के दौरान एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच राजनीतिक टकराव और हंगामे का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत है। भारी हंगामे के बीच लोकसभा कार्यवाही बुधवार तक स्थगित कर दी गई और कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।
भारतीय संसद के मानसून सत्र 2026 के दौरान मंगलवार को माहौल में ऐसा कुछ दिखा कि राजनीति का चेहरा सच में काफी तीखा लगा, और वहां एनडीए व इंडिया ब्लॉक के सांसद आपस में आमने सामने से नजर आए। संसद परिसर में जो “प्रदर्शन” हुआ, ठीक-ठाक तरीके से, दोनों तरफ से, वो ये बताता दिखा कि मौजूदा सत्र में राजनीतिक दूरियां कितनी… गहरी हो चुकी हैं। सत्ता पक्ष की तरफ से आरोप लगा कि विपक्ष सदन की कार्यवाही को जानबूझकर रोक रहा है, और हर अहम चर्चा से यूंही भागता फिर रहा है। उल्टा विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाते हुए जमकर नारेबाजी ठोक दी, मानो हर पल कोई जवाब मांग रहे हों। इसी जोर आज़माइश, हंगामे, और तीखी नोकझोंक के बीच, संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह सियासी पारा अचानक से चरम पर पहुंच गया।
जैसे ही कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी संसद भवन परिसर में पहुंचीं, वैसे ही वातावरण और गरम हो गया। उनके आने के साथ ही बीजेपी सांसदों की तरफ से राहुल गांधी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। फिर इसी कड़ी में बीजेपी सांसद मुकेश दलाल ने राहुल गांधी के उस कदम पर सवाल उठाए जिनमें उन्होंने झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की थी। सवालों की धार ये रही कि आखिर इस मुलाकात से राजनीतिक संदेश क्या है। इन बातों पर प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी पहले भी झारखंड जा चुके हैं, और वहां के छात्रों से मुलाकात भी की जा चुकी है। इस तरह का आमने सामने संवाद, साफ इशारा देता है कि सत्ताधारी और विपक्षी दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को घेरने का मौका छोड़ नहीं रहे, या शायद, छोड़े ही नहीं।
यह मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त तक चलेगा। लेकिन हंगामे और गतिरोध की वजह से विधायी कामकाज का असर साफ दिख रहा है। मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे तक हंगामे के चलते स्थगित कर दी गई। फिर जब दोपहर दो बजे सदन फिर से चालू हुआ, तब भी नारेबाजी कम नहीं हुई, और बात बढ़ती गई। नतीजा ये रहा कि मजबूरन लोकसभा की कार्यवाही को बुधवार तक रोकना पड़ा। हालांकि, तुलनात्मक रूप से राहत की बात ये रही कि राज्यसभा यानी उच्च सदन में कार्यवाही सुचारु रूप से चलती रही, बिना उस स्तर के व्यवधान के।
संसद के भीतर गतिरोध की एक बड़ी वजह दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई बताई जा रही है। इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से कड़े जवाब की मांग कर रहा है। सरकार की तरफ से कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह इस विषय पर खुली चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी का रुख कुछ और रहा। उनका कहना था कि विपक्ष सिर्फ गृह मंत्री की राय नहीं सुनना चाहता, बल्कि ये जानना चाहता है कि आखिरकार छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया था। यानी सवाल “निर्णय प्रक्रिया” पर घूम रहा है, सिर्फ बयानबाजी पर नहीं।
इसी राजनीतिक घमासान के बीच विधायी मोर्चे पर कुछ बड़े कदम भी उठाए गए। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम् से जुड़ा संशोधन विधेयक औपचारिक रूप से मंजूर कर दिया। इस बदलाव के प्रभाव से राष्ट्रीय गीत को “मजबूत” कानूनी संरक्षण मिला है। नए कानून के तहत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालना, या किसी सभा को उसे गाने से रोकना—अब एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में जेल, जुर्माने, और दोनों तरह की सजा का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, भारी हंगामे की पृष्ठभूमि में लोकसभा से केरल (नाम में बदलाव) विधेयक, 2026 भी पारित हुआ, जिसमें केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने की प्रक्रिया को पहले ही राज्य विधानसभा की सहमति मिल चुकी थी। इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 जैसे कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी मंजूर हुए।
इधर, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने राहुल गांधी से सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की है, यानी बातचीत का रुख थोड़ा सॉफ्ट रखने की कोशिश भी दिखी। लेकिन कुल मिलाकर, जिस तरह से एनडीए और इंडिया ब्लॉक की टकराहट, नारेबाजी, और विधायी अवरोध साथ-साथ चल रहे हैं… उससे लगता है कि सत्र का सियासी टेंशन आगे भी बना रहने वाला है।
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