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सभापति सीपी राधाकृष्णन ने जानकारी दी कि राज्यसभा इस मानसून सत्र में कुल 37 घंटे 49 मिनट चली। सत्र समाप्त होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
नई दिल्ली । भारी हंगामे और राजनीतिक गतिरोध के साए में चल रहा संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को आखिरकार अनिश्चितकाल के लिए खत्म हो गया, लेकिन “समाप्त” कहिए या बस रोक दिया जाए, वैसा माहौल ही रहा । सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सदन में मौजूद थे, फिर भी राष्ट्रगीत की धुन शुरू होते ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया । इस वजह से लोकसभा की कार्यवाही करीब चार मिनट से भी कम समय में जैसे थम सी गई ।
सत्र की विदाई के बाद उच्च सदन के आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं, जहां राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने बताया कि पूरा मानसून सत्र कुल 37 घंटे 49 मिनट तक चला । इस दौरान, हंगामे के बीच भी राज्यसभा में खनन कानून संशोधन से जुड़ा एक अहम विधेयक ध्वनिमत के जरिए पारित कराया गया । उसके बाद, राज्यों को खदानों पर टैक्स या सेस लगाना हो तो केंद्र की मंजूरी पहले लेनी पड़ेगी— यही प्रावधान रखा गया । अब राजनीतिक गलियारों में ये भी बोला जाने लगा है कि आगे चलकर किसी ‘विशेष सत्र’ बुलाए जाने की संभावना बन सकती है , और साथ ही सत्र समाप्त होने के बाद तमाम बड़े राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से औपचारिक मुलाकात करेंगे जैसी बातें भी चर्चा में रही हैं ।
20 जुलाई से शुरू हुए इस मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण कोई ठोस विधाई कामकाज नहीं हो सका । विपक्ष लगातार छात्र आंदोलन के दौरान संसद मार्च पर हुए लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाता रहा । हालांकि, बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि अगर विपक्ष सदन चलने दे, तो वे जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन अंतिम दिन तक भी इस विषय पर चर्चा नहीं हो पाई ।
इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपने कार्यक्रम के बाद सभास्थल के कथित “शुद्धिकरण” और हवन को लेकर भी सदन में तीखा शोर सुनने को मिला । इस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जांच का आश्वासन दिया, और फिर भी माहौल शांत नहीं हुआ।
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