MP शिक्षक भर्ती: खाली पदों पर प्रदर्शनों के बीच शिक्षा विभाग ने सामने रखा 'असली गणित', जानिए 59,000 प्रमोशन पदों का पूरा सच।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के खाली पदों और नई भर्ती को लेकर लगातार मांगें उठ रही हैं। सड़कों पर हो रहे इन प्रदर्शनों के बीच शिक्षा विभाग का कहना है कि अभ्यर्थियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता बरतना बेहद जरूरी है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के कड़े नियमों, आरक्षण व्यवस्था, विषयवार स्कूलों की आवश्यकता और पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकारों को भी किसी भी हाल में दरकिनार नहीं किया जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विभाग ने साफ किया है कि शिक्षक भर्ती में जो रिक्त पद दिख रहे हैं, उनका गणित इतना सीधा नहीं है। अभ्यर्थियों की हर मांग को गंभीरता से सुना जा रहा है, लेकिन भर्ती की प्रक्रिया में तय किए गए नियम, विषयों के हिसाब से जरूरतें, आरक्षण रोस्टर और सेवारत शिक्षकों के पदोन्नति (प्रमोशन) जैसे अधिकारों को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाया जा सकता है, जिसके लिए विभाग ने कई अहम तथ्य सामने रखे हैं।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर पांच सबसे बड़ी उलझनें सामने आई हैं। पहली, सीधी भर्ती के ज्यादातर खाली पद गणित और विज्ञान के हैं, ऐसे में दूसरे विषयों के अभ्यर्थियों को यहां नौकरी कैसे दी जा सकती है? दूसरी, एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग के पात्र अभ्यर्थी न मिलने से बड़ी संख्या में पद बैकलॉग में पड़े हैं, जिन्हें नियमों के तहत दूसरे वर्गों को नहीं दिया जा सकता। तीसरी बड़ी अड़चन यह है कि खाली पदों में लगभग 59,000 पद पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के प्रमोशन के लिए रिजर्व हैं, जिन्हें सीधी भर्ती से भरना नामुमकिन है। चौथा सवाल उन आंदोलनकारियों पर है जो खुद को चयनित बता रहे हैं, जबकि उनका नाम न तो चयन सूची में है और न ही वेटिंग लिस्ट में। पांचवां और आखिरी सवाल यह है कि पिछले तीन सालों में जिन नए युवाओं ने पढ़ाई पूरी कर योग्यता हासिल की है, उन्हें दरकिनार कर पहले के अचयनित अभ्यर्थियों को मौका कैसे दिया जा सकता है?
इस पूरे मामले को देखने के बाद यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि शिक्षक भर्ती का असली मुद्दा सिर्फ खाली पदों की कुल संख्या नहीं है। विभाग के मुताबिक, हर खाली पद सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध नहीं होता है। किसी भी पद को कैसे भरा जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह पद किस विषय का है, किस आरक्षण श्रेणी में आता है, उसके भर्ती नियम क्या हैं और क्या वह पद प्रमोशन के जरिए भरा जाना है।
इसलिए, अगर शिक्षक भर्ती के इस पूरे मामले को सिर्फ खाली पदों के एक बड़े आंकड़े के तौर पर देखा जाए, तो यह तस्वीर का सिर्फ एक ही पहलू होगा। इस समस्या का असली समाधान तभी निकल सकता है जब विषयवार पदों की जरूरत, एससी/एसटी बैकलॉग की स्थिति, प्रमोशन के लिए रखे गए 59 हजार पदों के हक, चयन सूची की सच्चाई और नए योग्य युवाओं के अधिकारों को एक साथ रखकर देखा जाए। अभ्यर्थियों की मांगों को सुनना जरूरी है, लेकिन आखिरी फैसला नियमों, आरक्षण और सेवारत शिक्षकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाकर ही लिया जाना होगा।

मध्य प्रदेश में बसों के सफर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पीपीपी मॉडल और क्लीन एनर्जी से हाईटेक बनाने के लिए इंदौर में 11 और 12 सितंबर को दो दिवसीय विजन समिट 2026 का बड़ा आयोजन होने जा रहा है।
बालाघाट जिले के सुदूर गांवों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। 40 साल के खौफ के बाद अब अपने गांवों में डॉक्टर घर-घर जाकर इलाज कर रहे हैं और नई सड़कें बन रही हैं।

भोपाल शहर में शिक्षक भर्ती के पदों को बढ़ाने को लेकर चल रहे धरने पर बड़ी खबर है। सरकार ने साफ कह दिया है कि रिजल्ट के बाद पद नहीं बढ़ेंगे। उधर भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं की तबीयत बिगड़ गई है।
हर बड़ी ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट्स सीधे अपने फेसबुक फीड पर पाएं।
Follow Page