फैजाबाद और आसपास के इलाकों के लिए सोमवार की रात काफी भारी रही। आधी रात को धरती के हिलने से लोग अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर आ गए।

सोमवार की अलसुबह अफगानिस्तान के लोगों के लिए बहुत ही खौफनाक साबित हुई। भारतीय समयानुसार 5 अक्टूबर 2026 की रात ठीक 1:57 बजे अचानक पूरी धरती जोर-जोर से हिलने लगी। इस भूकंप की तीव्रता 4.9 बताई जा रही है, जो जमीन के अंदर 220 किलोमीटर की गहराई से आया था। हालांकि, भगवान का शुक्र है कि इतने तेज झटके महसूस होने के बाद भी किसी के जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है और सभी लोग पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
NCS की रिपोर्ट और वहां के लोगों के मुताबिक, जब यह भूकंप आया तो पूरा इलाका गहरी नींद में था। अचानक से जब घरों के बर्तन गिरे और दीवारें हिलीं, तो लोग बुरी तरह घबरा गए। जान बचाने की फिक्र में लोग तुरंत एहतियात के तौर पर घरों से बाहर निकल आए और सड़कों पर भीड़ लग गई। बताया जा रहा है कि इस भूकंप का केंद्र 36.602° उत्तरी अक्षांश और 71.084° पूर्वी देशांतर पर था, जो अपने फैजाबाद शहर से सिर्फ 73 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व की तरफ मौजूद है।
वैसे तो कहा जाता है कि 4.9 तीव्रता का भूकंप बहुत ज्यादा बड़ा नहीं होता, लेकिन जब धरती हिलती है तो किसी को ये आंकड़े याद नहीं रहते। इस भूकंप से नुकसान होगा या नहीं, यह सिर्फ तीव्रता पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप 220 किलोमीटर की गहराई से आया था और मकान कितने पक्के थे। इसी वजह से हर मोहल्ले में इसका असर अलग-अलग महसूस हुआ। NCS ने भी अपनी लिस्ट में इसे बस ‘Felt it’ यानी 'महसूस किया गया' लिख कर दर्ज कर लिया है।
अपने अफगानिस्तान के इस इलाके में भूकंप आना कोई नई बात नहीं है, क्योंकि यह जगह खिसकती हुई टेक्टोनिक प्लेटों के ठीक ऊपर बसी है। इसलिए समय-समय पर धरती का हिलना यहां लगा ही रहता है। ऊपर से अपने ये पहाड़ी इलाके और कमजोर ईंट-पत्थर से बनी इमारतें इस डर को और बढ़ा देते हैं। जब भी भूकंप आता है, तो छतों के गिरने और पहाड़ों पर मिट्टी के खिसकने (भूस्खलन) का डर सबको सताने लगता है।
सुबह होते-होते जो शुरुआती खबरें आई हैं, उनसे पता चला है कि इस भूकंप में किसी की भी जान नहीं गई है और न ही कोई घायल हुआ है। किसी की दुकान या मकान के बड़े नुकसान की भी कोई खबर नहीं है। हालांकि, दूर-दराज के गांवों से पूरी खबर मिलने में थोड़ा समय लग ही जाता है। भूकंप के बाद रात भर मोहल्लों में जो डर का माहौल था, वो अब थोड़ा कम हुआ है। अपने इलाके का प्रशासन और सारी एजेंसियां इस पूरी घटना पर अपनी नजर टिकाए हुए हैं।

समंदर में काम करने वाले अपने देश के लोगों के लिए शुक्रवार का दिन काफी भारी रहा। एक तेल वाले जहाज पर हमला होने से सबके परिवारों की धड़कनें तेज हो गई थीं।
अपने पड़ोसी देश नेपाल और सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ ने भारी कोहराम मचा रखा है। 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 2 हजार लोग लापता हैं। इस बीच चीन की ओर से आई झील फटने की चेतावनी से सीमा पर हड़कंप मच गया है।

नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ का असर अब बिहार और पूर्वी यूपी तक पहुंच गया है। 178 लोगों की मौत और 300 भारतीयों के लापता होने के बीच गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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