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बालाघाट जिले के बैगा अंचल में इन दिनों एक भयानक बीमारी फैली हुई है। इसी बीच आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और मदद का ऐलान किया।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा अंचल में इन दिनों बीमारी का बहुत भारी प्रकोप फैला हुआ है। पिछले करीब ढाई महीने से अपने इस इलाके के सीधे-सादे लोग एक बहुत ही गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। इस बड़ी मुसीबत के बीच आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे बीमारी से प्रभावित अपने गांवों में पहुंचे। उन्होंने बिरसा विकासखंड के बैगा बाहुल्य ग्राम कोरका और बोनदारी का दौरा किया। वहां एक मंच पर मंत्रियों, विधायकों और पंचायत के लोगों के साथ बैठकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उन मृत बच्चों के संबंध में पूरी जानकारी ली जिनकी जान चली गई है और बच्चों के खाने-पीने (पोषण आहार) की स्थिति पर भी चर्चा की। इस दौरान अपने क्षेत्रीय विधायकों ने उन्हें वनाधिकार पट्टों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बारे में सब कुछ बताया।
अपने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना किसी तामझाम के प्रभावित परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी सारी समस्याएं सुनीं। उन्होंने बीमार बैगा परिवारों से खुद मिलकर उनका हालचाल जाना। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य, रोजगार और गांव में मौजूद बुनियादी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। इस भावुक मौके पर जब अपनी बैगा बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी, तो मुख्यमंत्री ने भी संकट की इस मुश्किल घड़ी में अपनी बहनों को हर संभव मदद देने का पूरा पक्का भरोसा दिया।
दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने अपने इस क्षेत्र के पिछड़ेपन पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह अपना बैगा अंचल लंबे समय तक खौफनाक नक्सल प्रभाव में रहा है। इसी नक्सलवाद के कारण अपने क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो पाए और पक्की सड़क, अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों तक नहीं पहुंच सकीं। उन्होंने सबको भरोसा दिलाया कि अब सरकार इस अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार के नए अवसरों और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवाने वाले मासूम बच्चों के परिवारों के प्रति गहरा दुख जताया। इस दुख की घड़ी में उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके परिजनों को सरकार की तरफ से 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इस भावुक कार्यक्रम के दौरान अपनी आदिवासी बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बड़े प्यार से राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 25 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री और मंत्री अपने इस कोर आदिवासी क्षेत्र में आए हैं। उन्होंने पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस के राज में नक्सलियों ने यहां एक मंत्री की हत्या तक कर दी थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कड़े नेतृत्व में इस नक्सलवादी आंदोलन को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
अपने मुख्यमंत्री के इस दौरे पर गांव में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भारी भीड़ जमा रही। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री उदयप्रताप सिंह, अपनी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, सांसद भारती पारधी, विधायक संजय उइके, गौरव सिंह पारधी, राजकुमार कर्राहे, और मधु भगत मौजूद थे। इनके साथ ही मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगतसिंह नेताम, पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य मौसम बिसेन, पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे और गौरीशंकर बिसेन सहित अपने कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस मौके पर उपस्थित रहे।

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