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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट लगभग समाप्त हो गया है। हालांकि, भारत के लिए फिलहाल पर्याप्त मात्रा में रूसी तेल उपलब्ध है।

पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल पर पहले की तरह कोई विशेष छूट (Discount) नहीं मिल रही है।
कंपनी का कहना है कि क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने के कारण दुनिया भर में वैकल्पिक तेल स्रोतों की मांग बढ़ गई है, जिससे रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट समाप्त हो गया है।
BPCL के वित्त निदेशक वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता ने कहा कि कीमतों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन रूस से तेल की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों ने अगस्त के अंत तक की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय रिफाइनरियां केवल उन रूसी आपूर्तिकर्ताओं से तेल खरीद रही हैं जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते।
कंपनी के अनुसार, मौजूदा वैश्विक हालात में भारतीय रिफाइनरियों की प्राथमिकता कम कीमत पर तेल खरीदने से ज्यादा ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय कंपनियां बिना डिस्काउंट के भी तेल खरीदने को तैयार हैं, ताकि देश में ईंधन आपूर्ति प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
तेल आपूर्ति में आई बाधा के कारण एशिया और यूरोप के कई खरीदारों ने रूस सहित अन्य देशों से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया, जिससे रूसी तेल की मांग बढ़ी और डिस्काउंट खत्म हो गया।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल की खरीद कम किए जाने से भारत ने रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदना शुरू किया था।
आज रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रूस से आया था।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारत की ऊर्जा आयात रणनीति और खरीद नीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुईं रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत एक वायरल इंस्टाग्राम स्टोरी के बाद चर्चा में हैं। CRPF सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया दिशानिर्देशों के संभावित उल्लंघन को लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत से कहा कि भारत का लक्ष्य केवल ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करना नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार, रिसर्च और नई तकनीकों के विकास का नेतृत्व करना होना चाहिए।
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