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इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा है कि यदि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति दी जाती है तो इससे हितों का गंभीर टकराव पैदा होगा और इसका नुकसान यात्रियों को उठाना पड़ सकता है।

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन संचालित करने की संभावित अनुमति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसा फैसला लेती है तो इससे हितों का गंभीर टकराव (Conflict of Interest) पैदा होगा और लंबे समय में इसका असर यात्रियों के हितों पर भी पड़ सकता है।
राहुल भाटिया ने यह टिप्पणी कंपनी की तिमाही नतीजों के बाद आयोजित निवेशक कॉल के दौरान की।
राहुल भाटिया ने कहा कि मीडिया में सामने आ रही खबरों पर इंडिगो भी नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि यदि इन खबरों में सच्चाई है तो यह वैश्विक स्तर पर भी असामान्य कदम होगा।
उनके मुताबिक, एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी यदि अपनी एयरलाइन भी चलाएगी तो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है और यात्रियों के हितों पर भी असर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइन कंपनियों के बीच क्रॉस-ओनरशिप से जुड़े नियमों में बदलाव पर शुरुआती स्तर पर विचार कर रहा है।
इन अटकलों के बीच यह भी कहा गया कि देश के आठ एयरपोर्ट संचालित करने वाला अडानी समूह भविष्य में एयरलाइन कारोबार में उतरने पर विचार कर सकता है। हालांकि अडानी एंटरप्राइजेज पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह फिलहाल एयरलाइन शुरू करने के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है।
विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर को अपनी एयरलाइन चलाने की अनुमति मिलती है तो वह अपनी एयरलाइन को स्लॉट आवंटन, परिचालन सुविधाओं और अन्य सेवाओं में प्राथमिकता दे सकता है। इससे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार भविष्य में ऐसा कोई निर्णय लेती है तो उसके साथ कड़े नियामकीय प्रावधान और स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था भी जरूरी होगी।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। फिलहाल देश के घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो और एयर इंडिया समूह की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है। सरकार का मानना है कि नए खिलाड़ियों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और यात्रियों को अधिक विकल्प मिल सकते हैं।

रूस से कच्चे तेल के आयात में तेजी आने के बीच भारत ने मार्च से मई के दौरान करीब 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान रुपये में किया। आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा आयात में रुपये के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, वहीं सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहा है।
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