भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद शहर में काम शुरू हो गया। CM की बैठक में 10 में से 8 मांगों पर सहमति बनी।

भोपाल में तीन दिन तक चली सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार देर रात समाप्त हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद यूनियनों ने काम पर लौटने की घोषणा की। शनिवार सुबह से कचरा उठाने और सफाई का काम फिर शुरू हुआ। हड़ताल के दौरान दिवाली का कचरा जमा होने से कई सड़कें, बाजार और कॉलोनियां प्रभावित हुई थीं।
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों ने कुल 10 मांगें रखीं। इनमें से 8 पर सहमति बनने की जानकारी यूनियन अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने दी। नियमितीकरण के लिए कमेटी गठित की जाएगी। सीएम ने एक महीने के भीतर मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन खत्म कर दिया।
हड़ताल के कारण भोपाल के 85 वार्डों और 21 जोन में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। घरों से कचरा उठाने और सड़कें साफ करने का काम बंद था। दिवाली के दौरान निकला कचरा भी जमा होता गया। न्यू मार्केट, वल्लभ भवन और चार इमली सहित शहर के विभिन्न हिस्सों में कचरे के ढेर दिखाई देने लगे थे।
राजधानी में सफाई व्यवस्था के लिए 7 हजार से ज्यादा कर्मचारी और 400 से अधिक कचरा गाड़ियां काम करती हैं। रोजाना करीब 850 मीट्रिक टन कचरा उठाया जाता है। हड़ताल और त्योहार के कारण तीन दिन में 3 हजार मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा होने का अनुमान लगाया गया।
सफाई कर्मचारी करीब 10,500 रुपये मासिक वेतन मिलने की बात कहते हुए इसे 25 हजार रुपये करने की मांग कर रहे थे। उनकी मांगों में ठेका व्यवस्था खत्म करना, स्थायी नियुक्ति, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और कर्मचारी की मृत्यु पर पति या पत्नी में से किसी एक को अनुकंपा नियुक्ति देना शामिल है। अब बाकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

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