गांवों की संपत्तियों का रिकॉर्ड बनाने वाली स्वामित्व योजना में करीब 50 लाख संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य है।

मध्य प्रदेश में सरकार और पटवारी संघ का विवाद खत्म हो गया है। शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद संघ ने 12 अक्टूबर से काम पर लौटने का फैसला लिया। पटवारी मांगों के लिए सामूहिक अवकाश पर थे, जिससे जमीनों के पंजीयन का काम प्रभावित हुआ था।
योजना में गांवों की संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और लोगों को उनकी संपत्ति के दस्तावेज दिए जा रहे हैं। प्रदेश में करीब 50 लाख संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें पटवारियों की भूमिका अहम है, इसलिए उनके लौटने से प्रक्रिया फिर आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी बैठक की जानकारी साझा की। पटवारी संघ ने योजना का काम पूरी प्रतिबद्धता से बढ़ाने का भरोसा दिया है। अब 12 अक्टूबर से काम शुरू होने और सरकार के वादों पर अमल का इंतजार है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार योजना में काम करने वाले पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने के लिए जरूरी आदेश जारी होंगे। पटवारियों को आशंका थी कि जमीन के रिकॉर्ड या पंजीयन के विवाद में उन पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए वे साफ सुरक्षा नियम मांग रहे थे।
बैठक में 17 सितंबर के बाद पटवारियों पर हुई विभागीय कार्रवाई वापस लेने पर भी सहमति की बात आई है। फिर भी इन फैसलों के लिए सरकारी आदेश आना जरूरी है। कार्रवाई वापसी और कानूनी संरक्षण की असल स्थिति आदेश आने के बाद ही साफ होगी।
भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के मुताबिक वेतन विसंगति और अन्य आर्थिक मांगों पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। वेतन विसंगति पर आयोग बनने के बाद आगे विचार की बात कही गई है। 27 अक्टूबर को पटवारियों के महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा का आश्वासन भी मिला है। अब पटवारी संघ की नजर सरकार के अगले कदम पर है।
योजना में अपेक्षित प्रगति न होने पर सरकार ने कई जिलों में कार्रवाई की थी। 8 अक्टूबर की नईदुनिया रिपोर्ट के अनुसार सात जिलों में 27 प्रोबेशनर पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गईं। विरोध में संघ ने सामूहिक अवकाश और सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने का फैसला किया था।
विवाद न सुलझा तो संघ के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिले। 9 अक्टूबर की इस बैठक के बाद भी संघ ने मांगें पूरी होने तक काम पर न लौटने की बात कही थी। फिर मुख्यमंत्री के साथ बैठक में सहमति बनी। पटवारियों की मुख्य मांग थी कि पंजीयन विवादों में कानूनी सुरक्षा मिले, आंदोलन के दौरान की कार्रवाई वापस हो और वेतन की समस्याएं सुलझें।

उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन और इंदौर के उद्योगपतियों से संवाद, गोरेलाल जी ने विनोद कुमार की यादें साझा कीं।

विद्यार्थियों ने चंद्रयान और श्रीराम मंदिर पर रंगोली बनाई, साथ में भारत के नक्शे की मानव श्रृंखला भी बनी। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बात की।
नाजिया इलाही खान 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर उज्जैन में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करेंगी।
हर बड़ी ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट्स सीधे अपने फेसबुक फीड पर पाएं।
Follow Page