राजगढ़ जिले में पचोर-सारंगपुर मार्ग पर उफनते झिरी नाले में ईको वैन बह जाने से बीमार महिला का इलाज कराने जा रहे एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई। 15 मिनट इंतजार करने के बाद उतावली में गाड़ी नाले में उतारी गई थी।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार सुबह एक ऐसा हादसा सामने आया कि सबके दिल दहल गए। बीमार परिजन का इलाज कराने जा रहा एक ही परिवार ,उसकी खुशियां, उफनते नाले की भेंट चढ़ गईं। पचोर-सारंगपुर मार्ग पर पड़ाना कस्बे के पास तेज बारिश के चलते झिरी नाले का पानी अचानक उफान पर था। उसी उफनते नाले के पानी में ईको वैन बह गई, और देखते ही देखते पूरा मंजर बदल गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में तीन मासूम बच्चों और दो महिलाओं सहित 9 लोगों की असमय मौत हो गई। वहीं कार में सवार दो युवक किसी तरह तैरते हुए किनारे पहुँच गए ,वरना शायद सबकुछ वहीं खत्म हो जाता। हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ित परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।
हादसे के बाद सुरक्षित बाहर निकल आए वाहन चालक मुकेश सिंह ने सारंगपुर अस्पताल में बताया कि उनका परिवार देवास जिले के सतवास क्षेत्र के धांसड़ गांव का रहने वाला है। परिवार की एक महिला लकवे की बीमारी से जूझ रही थी, जिसे इलाज के लिए कनावड़ धाम (कड़लावद गांव की ओर) ले जाया जा रहा था। सुबह करीब 9:30 बजे कार पढ़ाना के पास पहुंची, तो 30 फीट लंबा निर्माणाधीन पुल के ऊपर से झिरी नाले का पानी तेज रफ्तार में बह रहा था। स्थानीय ग्रामीणों ने पहले ही खतरा भांप लिया था, इसलिए उन्होंने गाड़ी रोकने की बात कही। परिवार करीब 15 मिनट तक वहां रुका भी रहा, लेकिन समय पर धाम पहुंचने की टेंशन में कुछ परिजनों ने कार आगे बढ़ा देने का सुझाव दे दिया। बस फिर क्या, जैसे ही कार नाले के पानी में उतरी, सड़क पर सुरक्षा रेलिंग न होने के कारण वह फिसलकर सीधे नाले के तेज बहाव में बह गई।
पानी के प्रचंड वेग के बीच चालक मुकेश सिंह और हुकुम सिंह किसी तरह तैरते हुए बाहर निकल आए। दोनों को तुरंत सारंगपुर अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन कार में सवार बाकी 9 लोगों को बचने का मौका नहीं मिला और वे पानी में डूब गए। मृतकों की पहचान शंकर सिंह, उनकी पत्नी सागरबाई, रीनू (पत्नी हुकुम सिंह), 3 वर्षीय बालक राजवीर, जसप्रीत, विशाल चौहान, उनकी पत्नी पूजा चौहान, रिशिका और आनंद सिंह के तौर पर हुई है। बच्चों और परिजनों की मौत की खबर जैसे ही गांव धांसड़ और आसपास फैली, वैसे ही शोक का माहौल बन गया।
दुर्घटना होते ही ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन को सूचना दी। फिर एसडीएम रोहित बम्होरे, एसडीओपी अरविंद सिंह, और थाना प्रभारी राहुल रघुवंशी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। आपदा मोचन बल यानी SDERF की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। जब पानी का स्तर थोड़ा कम हुआ, तब क्रेन की सहायता से उफनते नाले में समाई ईको वैन को बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके में कड़ी मशक्कत के साथ खोजबीन की, और आखिरकार सभी 9 शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
राजगढ़ में हुई इस दुर्घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर दिवंगतों के प्रति संवेदना जताई और प्रशासन को निर्देश दिए कि हर मृतक के आश्रित परिवार को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। मुख्यमंत्री ने साथ ही ईश्वर से शोकाकुल परिजनों को इस वज्रपात को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

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