पाकिस्तान के स्थानीय इलाकों में हालात बेकाबू हैं। बलूचिस्तान में 14 अगस्त को 'ब्लैक डे' मनाया जा रहा है, स्वात में बम धमाके हो रहे हैं और PoJK में JAAC का हिंसक प्रदर्शन जारी है। इन सबके बावजूद पीएम शहबाज शरीफ पहलगाम हमले (26 मौत) के बाद भारत द्वारा रोकी गई सिंधु जल संधि को लेकर धमकियां दे रहे हैं।
पाकिस्तान की आम जनता इन दिनों कुछ ज्यादा ही परेशान-सी है। एक तरफ आसमान छूती महंगाई है, और दूसरी तरफ उनके ही इलाकों में बम धमाके, वो भी रोज़ रोज़, बस गूंजते रहते हैं। स्थानीय लोगों का गुस्सा सरकार के खिलाफ फिसल कर फूट पड़ा है, और फिर भी, एक तरह से, इस्लामाबाद में बैठे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 14 अगस्त के जश्न से पहले सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को अपनी “रेड लाइन” कहकर भारत को धमकियां दे रहे हैं। शरीफ कहते कुछ और हैं, कि पानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा, पर सच ये है कि उनके अपने ही सूबों में जनता पानी के लिए नहीं, बल्कि खून और आंसुओं के बीच रोज़मर्रा से जूझ रही है, दर्द बस जमा होता जा रहा है।
बलूचिस्तान के स्थानीय निवासियों और राष्ट्रवादी समूहों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय नेताओं ने 14 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को ‘ब्लैक डे’ मानने की अपील की है, लोग काले झंडे और काली पट्टी लगाकर सरकारी समारोहों का बहिष्कार कर रहे हैं। इलाके में खौफ का माहौल ऐसे ही नहीं, बल्कि 12 अगस्त को सुरक्षा बलों ने 10 आतंकवादियों को मार गिराया… उसी के बाद और ज्यादा चढ़ गया। इसी बीच सुराब इलाके में एक कार बम समय से पहले फट जाने की बात सामने आई, जिसमें 3 स्थानीय नागरिक और 8 हथियारबंद लोगों की मौत हो गई, और ये खबर सुनते ही लोग सकते में हैं।
खैबर पख्तूनख्वा के स्वात इलाके के स्थानीय नागरिक भी दहशत में हैं। 2 अगस्त को, जब लोग यहां बढ़ती आतंकी गतिविधियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कर रहे थे, उसी दौरान काबल पुलिस स्टेशन के पास एक दिल दहला देने वाला आत्मघाती हमला हुआ। विस्फोट में 17 लोगों की जान चली गई और 34 घायल बताए गए। मारे गए लोगों में पुलिस के जवान भी हैं, और कुछ आम नागरिक भी… मतलब असर सिर्फ एक तबके तक नहीं रहा। स्थानीय आवाम अपनी ही सरकार से सुरक्षा मांगते-मांगते थक-से गए हैं, पर भरोसा टूटता जा रहा है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) का हाल भी बिल्कुल तनावपूर्ण है। Joint Awami Action Committee (JAAC) के बैनर तले स्थानीय लोग अपने राजनीतिक और चुनावी हक के लिए सड़कों पर उतर आए। जुलाई के अंत में सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच हुई हिंसक झड़पों के चलते प्रशासन ने इंटरनेट बंद कर दिया। अगस्त में स्थानीय चुनावों के अंतिम चरण को जबरन टालना पड़ा, ऐसा कहा जा रहा है। JAAC के साथ-साथ जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने भी इस चुनावी प्रक्रिया का बहिष्कार किया है, इसलिए माहौल और चटक रहा है।
इन तमाम स्थानीय और क्षेत्रीय बातों से अलग, भारत ने अपनी सुरक्षा नीति को साफ-साफ, बिना घुमाए, रख दिया है। 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत ने पूरे देश को अंदर तक हिला दिया। फिर 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का फैसला किया। भारत का कहना है कि जब तक सीमा पार से स्थानीय लोगों की जान लेने वाला आतंकवाद थमेगा नहीं, तब तक पाकिस्तान से पानी को लेकर कोई बात नहीं होगी, और ये लाइन भारत ने पहले ही बता दी थी।
अपने पड़ोसी देश नेपाल और सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ ने भारी कोहराम मचा रखा है। 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 2 हजार लोग लापता हैं। इस बीच चीन की ओर से आई झील फटने की चेतावनी से सीमा पर हड़कंप मच गया है।

नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ का असर अब बिहार और पूर्वी यूपी तक पहुंच गया है। 178 लोगों की मौत और 300 भारतीयों के लापता होने के बीच गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
नेपाल के रसुवा में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ के बाद अपने बिहार के 8 जिलों में भी प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। गंडक नदी में पानी के स्तर के तेजी से बढ़ने की आशंका है।
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