नवरात्रि और दशहरे के दौरान पंडालों, गरबा आयोजनों और मेलों में लाउडस्पीकर की तेज आवाज आम है। हालांकि, लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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Health News : नवरात्रि और दशहरे के दौरान पंडालों, गरबा आयोजनों और मेलों में लाउडस्पीकर की तेज आवाज आम है। हालांकि, लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ नींद, तनाव और ब्लड प्रेशर पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शोर का खतरा उसकी तीव्रता के साथ इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी देर तक उसके संपर्क में रहता है।
सामान्य बातचीत की आवाज करीब 60 डेसीबल होती है, जबकि तेज लाउडस्पीकर की आवाज 85 से 110 डेसीबल या इससे ज्यादा हो सकती है। लंबे समय तक तेज शोर में रहने से कानों के अंदर मौजूद नाजुक हेयर सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है। इससे कानों में सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई देने और सुनने की क्षमता कम होने का खतरा रहता है। कुछ मामलों में यह नुकसान स्थायी भी हो सकता है।
तेज शोर शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। इससे तनाव से जुड़े हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है और नींद प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने का संबंध हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के बढ़े हुए जोखिम से भी पाया गया है। लगातार शोर के कारण सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, थकान और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
1. स्पीकर से दूरी रखें: तेज आवाज वाले स्पीकर के ठीक सामने या पास खड़े होने से बचें।
2. कम समय तक रहें: तेज शोर वाली जगह पर ज्यादा देर रुकने से बचें।
3. कान की सुरक्षा करें: जरूरत पड़ने पर उपयुक्त ईयरप्लग का इस्तेमाल करें।
4. बच्चों का ध्यान रखें: बच्चों को तेज आवाज वाले स्पीकर के पास न ले जाएं।
5. कान में परेशानी होने पर हट जाएं: कानों में सीटी, दर्द या सुनने में परेशानी महसूस हो तो शोर वाली जगह से दूर जाएं।
6. रात में तेज आवाज से बचें: देर रात तेज शोर नींद और आराम को प्रभावित कर सकता है।
7. साउंड की उचित सीमा रखें: आयोजक आवाज का स्तर नियंत्रित रखें और निर्धारित मानकों का पालन करें।
भारत में लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि प्रणालियों के इस्तेमाल पर Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के तहत नियम लागू हैं। सामान्य तौर पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए संबंधित प्राधिकरण की लिखित अनुमति जरूरी होती है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, हालांकि राज्य सरकार नियमों के तहत निर्दिष्ट त्योहारों या विशेष अवसरों पर सीमित छूट दे सकती है।
ध्वनि की निर्धारित सीमा क्षेत्र के अनुसार अलग होती है। आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय 55 और रात में 45 डेसीबल, जबकि साइलेंस जोन में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल की सीमा निर्धारित है।
यदि किसी आयोजन में निर्धारित सीमा से ज्यादा शोर हो रहा है या नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, तो संबंधित पुलिस थाने या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत की जा सकती है। शिकायत करते समय आयोजन का स्थान, समय और शोर के स्रोत की जानकारी दें। संभव हो तो फोटो या वीडियो जैसे साक्ष्य भी रखें।
ध्यान रखें: त्योहारों की खुशियों के बीच अपनी और दूसरों की सेहत का ख्याल रखना भी जरूरी है। आवाज को नियंत्रित रखकर और तेज शोर से दूरी बनाकर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम किए जा सकते हैं।

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