मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के दरबार को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता की आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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Dewas News: शारदीय नवरात्रि में देवास की माता टेकरी पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के दरबार को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता की आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यहां मां के दर्शन के साथ कई ऐसी धार्मिक परंपराएं भी जुड़ी हैं, जिन्हें भक्त अपनी आस्था और मनोकामनाओं से जोड़कर देखते हैं।
देवास की करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिर स्थित हैं। मान्यता है कि मां तुलजा भवानी सुबह बाल अवस्था, दोपहर में युवा अवस्था और शाम को वृद्ध स्वरूप में भक्तों को दर्शन देती हैं। नवरात्रि में मंदिर में विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना की जाती है।
माता टेकरी पर संतान की कामना के लिए पांच पान का बीड़ा चढ़ाने की परंपरा है। पुजारी विधि-विधान से बीड़ा माता को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि बीड़ा महिला की झोली में गिरने को माता का आशीर्वाद माना जाता है। इसके बाद पुजारी महिलाओं को चुनरी में सवा पाव चावल बांधकर देते हैं। मनोकामना पूरी होने पर परिवार दोबारा माता के दर्शन करने पहुंचता है।
माता के दरबार में श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार भोग और पूजा सामग्री चढ़ाते हैं। यहां 56 पकवान और पांच तरह के फलों का भोग लगाने की परंपरा भी है। मान्यता के अनुसार, मनोकामना पूरी होने पर भक्त मीठे भजिए चढ़ाकर माता का आभार जताते हैं। कुछ श्रद्धालु मन्नत मांगने के लिए उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।
माता टेकरी तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं के पास सीढ़ियों और रोप-वे का विकल्प है। मंदिर तक करीब 300 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जा सकता है। वहीं, रोप-वे की यात्रा लगभग 376 मीटर की है, जिससे करीब साढ़े पांच मिनट में टेकरी तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।
नवरात्रि के दौरान माता टेकरी पर पूजा-अर्चना, आरती और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूरे परिसर में भक्ति का माहौल बना हुआ है।
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उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में भी नवरात्रि का अलग रंग देखने को मिल रहा है।
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नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध हुआ था।

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