करीब तीन साल चली सुनवाई के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता, और भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से जुड़े उस चर्चित यौन शोषण मामले में एक बड़ी राहत मिली है । दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें साथ ही WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि अगर आरोप सच में सिद्ध हो जाते तो वो सजा भुगतने को भी तैयार थे, पर कोर्ट ने उन्हें सम्मान से बरी कर दिया है ।
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ये फैसला सुनाया। उससे पहले 2 जुलाई 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों मौजूद रहे। फैसले के बाद उनके समर्थकों के चेहरों पर खुशी साफ दिखी।
ये मामला जनवरी 2023 में शुरू हुआ था, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और कुछ अन्य महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। खिलाड़ियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर कार्रवाई की मांग उठाई थी। उस समय बृजभूषण भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष थे, और यह पूरे देश में चर्चा का मसला बन गया था।
लगभग तीन साल तक चलने वाले इस केस में कुल 127 बार सुनवाई हुई। 20 जुलाई 2023 से बृजभूषण नियमित जमानत पर थे। फिर 10 मई 2024 को दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने आरोप तय कर दिए, और इसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। लगभग 1133 दिनों की कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया।
अदालत से बरी होने का मतलब ये माना जाता है कि अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपों को पर्याप्त ढंग से साबित नहीं कर पाया, इसलिए आरोपी को दोषी नहीं माना गया। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जो बातें कही गई थीं, वो हर स्तर पर तथ्यात्मक रूप से गलत ही साबित हुईं। अगर शिकायतकर्ता चाहें तो कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में अपील भी कर सकते हैं।
मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। पहले छह महिला खिलाड़ियों ने शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में एक नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस लेते हुए बयान बदल दिया था। वहीं बृजभूषण शरण सिंह शुरू से आरोपों को राजनीति से प्रेरित और निराधार बताते रहे ।
महिला पहलवानों ने अलग-अलग प्रतियोगिताओं के दौरान कई तरह के अनुचित व्यवहार का जिक्र किया था। शिकायतों में बुल्गारिया, जापान, बिसकेक, लखनऊ, कर्नाटक, मंगोलिया और जकार्ता में आयोजित प्रतियोगिताओं के दौरान कथित तौर पर गलत तरीके से छूने, निजी टिप्पणी करने, अनुचित आचरण करने और मानसिक दबाव बनाने जैसे आरोप शामिल बताए गए। इन्हीं आरोपों के आधार पर जांच और ट्रायल आगे बढ़े।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह अपने आवास पहुंचे, जहां समर्थकों ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।” उनके बेटे करण भूषण ने सोशल मीडिया पर इसे सत्य की जीत बताया। दूसरी ओर WFI अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने भी कोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि न्यायालय ने अपना निर्णय तथ्यों के आधार पर दिया है ।
18 जनवरी 2023: महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया।
20 जनवरी 2023: भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने जांच समिति बनाई।
21 जनवरी 2023: खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से बातचीत के बाद पहला धरना खत्म हुआ।
30 मई 2023: पहलवान हरिद्वार में मेडल बहाने पहुंचे, लेकिन फैसला टाल दिया गया।
7 जून 2023: सरकार के साथ बैठक के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई।
अदालत के फैसले के बाद अभी बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को राहत मिल गई है। हालांकि कानूनी रास्ते अभी भी खुले हैं, और शिकायतकर्ता तय प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। ऐसे में इस चर्चित मामले में आगे की कानूनी गतिविधियों पर सबकी नजर लगी रहना तय है।
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