मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम मामले में मुस्कान की 10 महीने की बेटी मन्नत की परवरिश को लेकर चर्चा तेज है।
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New Delhi: मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम मामले में मुस्कान की 10 महीने की बेटी मन्नत की परवरिश को लेकर चर्चा तेज है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने बच्ची की शिक्षा, चिकित्सा, पालन-पोषण और भविष्य के खर्च उठाने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह बच्ची को गोद लेने के बजाय आर्थिक सहायता देना चाहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया क्या है और किसी बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी किसे सौंपी जा सकती है?
भारत में किसी बच्चे की कस्टडी यानी अभिरक्षा और कानूनी गोद लेना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। बच्चे की देखभाल का फैसला उसके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर किया जाता है। मां की सहमति, पारिवारिक परिस्थितियों और बच्चे की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, केवल मां की सहमति से हर मामले में कस्टडी का फैसला अपने आप नहीं हो जाता; संबंधित कानून और सक्षम प्राधिकरण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
यदि परिवार का कोई सदस्य बच्चे की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है, तो उसकी उपयुक्तता और बच्चे के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव अपने आप में गोद लेने या कस्टडी का अधिकार नहीं देता।
भारत में कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया मुख्य रूप से किशोर न्याय अधिनियम और केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नियमों के तहत संचालित होती है। भावी दत्तक माता-पिता को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें पंजीकरण, दस्तावेजों का सत्यापन, परिवार का आकलन और बच्चे को कानूनी रूप से गोद देने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
- विवाहित दंपती: दोनों की सहमति जरूरी होती है। पात्रता तय करते समय वैवाहिक स्थिति, उम्र, स्वास्थ्य और अन्य निर्धारित मानदंड देखे जाते हैं।
- अविवाहित महिला: वह निर्धारित शर्तें पूरी करने पर लड़का या लड़की, दोनों को गोद ले सकती है।
- अविवाहित पुरुष: वह निर्धारित नियमों के तहत लड़के को गोद ले सकता है, लेकिन लड़की को गोद लेने के लिए पात्र नहीं है।
बच्चे की उम्र के आधार पर भावी दत्तक माता-पिता की अधिकतम संयुक्त आयु या एकल माता-पिता की अधिकतम आयु निर्धारित होती है। इसके अलावा, माता-पिता और बच्चे के बीच कम से कम 25 वर्ष का आयु-अंतर भी सामान्य रूप से आवश्यक है। विशेष परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार पात्रता की जांच की जाती है।
इसलिए गोद लेने की योजना बना रहे लोगों को आवेदन से पहले CARA के मौजूदा नियमों की जांच करनी चाहिए, क्योंकि उम्र की सीमाएं और अन्य शर्तें बच्चे की श्रेणी तथा आवेदक की स्थिति के अनुसार लागू होती हैं।
भावी दत्तक माता-पिता की शारीरिक और मानसिक सेहत, बच्चे की देखभाल करने की क्षमता और पारिवारिक परिस्थितियों का आकलन किया जाता है। बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित परवरिश सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। आर्थिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
जिन परिवारों के पहले से बच्चे हैं, उनके लिए भी कुछ अतिरिक्त पात्रता शर्तें लागू हो सकती हैं। हालांकि, विशेष जरूरतों वाले बच्चों या अधिक उम्र के बच्चों को गोद लेने के मामलों में अलग प्रावधान हो सकते हैं।
जेल में बंद मां के साथ रहने वाले बच्चे की देखभाल का मामला संवेदनशील होता है। ऐसे मामलों में बच्चे की उम्र, सुरक्षा, मां की स्थिति और वैकल्पिक देखभाल की व्यवस्था को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है। बच्चे को मां से अलग करने या किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने का फैसला केवल किसी बाहरी व्यक्ति की इच्छा के आधार पर नहीं किया जा सकता।
मुस्कान की बेटी के मामले में भी बच्ची के भविष्य से जुड़ा कोई फैसला लागू कानून और सक्षम बाल कल्याण प्राधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। फैजान अंसारी की आर्थिक सहायता की पेशकश और कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्ची की सुरक्षा, स्थिर परवरिश और सर्वोत्तम हित हैं।
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नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है। परिवहन मंत्रालय के नए ड्राफ्ट के मुताबिक, ड्राइविंग टेस्ट में पास होने के लिए न्यूनतम अंक 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी ठहराई गई मुस्कान की 10 माह की बेटी मन्नत उर्फ राधा की परवरिश को लेकर एक नया मामला सामने आया है।
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CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों और वॉलंटियर्स से दिवाली तक किसी भी प्रदर्शन की योजना नहीं होने की बात कही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि पिछले कुछ दिनों में आंदोलन के दौरान आई मुश्किलों के बाद वे त्योहार अपने परिवार और करीबियों के साथ बिताएं।
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