इंदौर और आसपास के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। इंदौर से भोपाल, उज्जैन, मांडू और निमाड़ के लिए 26 नई ग्रीन लाइन इलेक्ट्रिक बसें जल्द शुरू होने वाली हैं।
इंदौर और आसपास के यात्रियों के लिए एक बहुत ही बढ़िया और राहत भरी खबर सामने आई है। शहर में सिटी बसों के बाद अब बाहर के सफर को आसान और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए 26 नई ग्रीन लाइन इलेक्ट्रिक बसें चलाने की पूरी तैयारी हो गई है। ये शानदार ई-बसें अपने इंदौर को भोपाल, बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन और आसपास के पर्यटन स्थलों से सीधे जोड़ेंगी।
ग्रीन मोबिलिटी के तहत इंदौर से पांच बड़े रूटों पर ये बसें चलाई जाएंगी। तय रूटों के अनुसार इंदौर-भोपाल रूट पर 8 बसें, इंदौर-उज्जैन रूट पर 6 बसें, इंदौर-मांडू घूमने के लिए 2 बसें, इंदौर-खरगोन-खंडवा रूट पर 8 बसें और इंदौर-सेंधवा रूट पर 2 बसें चलेंगी। इस तरह कुल 26 नई बसें अपने मालवा और निमाड़ अंचल की सड़कों पर उतरेंगी।
इन सभी नई इलेक्ट्रिक बसों में हम सभी यात्रियों के लिए बढ़िया सुविधाएं होंगी और सफर के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग का विकल्प भी मिलेगा। बसों को अच्छे से चलाने और संभालने का काम ऑपरेटरों को 8 साल के लिए सौंपा जाएगा। यह पूरा काम नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत किया जाएगा ताकि यात्रियों को रोजाना बिना किसी परेशानी के बस सेवा मिल सके।
इसके अलावा मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत अपने दूर-दराज के शहरों को जोड़ने वाले 20 से ज्यादा रूटों पर टेंडर का काम बिल्कुल आखिरी दौर में है। अपने इंदौर से सागर, जबलपुर, शहडोल और बालाघाट जैसे शहरों के लिए भी जल्द ही बस ऑपरेटर तय हो जाएंगे, जिससे लंबे सफर में भी हम लोगों को बेहतरीन और सीधी बसें मिल सकेंगी।
अपने शहर में पीएम ई-बस सेवा का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। इंदौर के 14 सिटी बस रूटों पर पहले से ई-बसें चल रही हैं और आने वाले दिनों में करीब 150 और नई बसें सड़कों पर उतरेंगी। इसके बाद अपने इंदौर और उज्जैन संभाग में कुल मिलाकर 170 से ज्यादा ई-बसें हो जाएंगी, जिससे पूरे इलाके में आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री तुलसीराम सिलावट कॉन्क्लेव में मौजूद रहे। मालवा के सोया उद्योग की बातें और सम्मान समारोह पढ़ें।

मखाना आज हेल्दी स्नैक के तौर पर काफी पसंद किया जाता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कैल्शियम, मैग्नीशियम व फॉस्फोरस जैसे खनिज पाए जाते हैं।

जबलपुर से इंदौर तक कुल मिलाकर सात जिले में अलग अलग तरह की इंडस्ट्री की योजना पड़ी हुई है, आप बस एक बार देखो कि आपके जिले में IT, फूड प्रोसेसिंग या लॉजिस्टिक्स का क्या प्रोग्राम है. क्या कुछ खास तय हुआ है?
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