दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। बाजारों में बर्फी, लड्डू, रसगुल्ले और दूसरी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। लेकिन त्योहारों के दौरान मिलावटी और अस्वच्छ तरीके से तैयार मिठाइयां सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं।
Health News: दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। बाजारों में बर्फी, लड्डू, रसगुल्ले और दूसरी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। लेकिन त्योहारों के दौरान मिलावटी और अस्वच्छ तरीके से तैयार मिठाइयां सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले घटिया कच्चे माल, हानिकारक रंग और साफ-सफाई की कमी से फूड पॉइजनिंग का जोखिम बढ़ सकता है।
मुनाफा बढ़ाने के लिए कुछ मिलावटखोर मावे का वजन बढ़ाने के लिए उसमें स्टार्च, चावल या गेहूं का आटा और अन्य गैर-खाद्य पदार्थ मिला सकते हैं। घी की जगह वनस्पति या पाम ऑयल जैसे विकल्पों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। वहीं, मिठाइयों को आकर्षक रंग देने के लिए कुछ जगहों पर प्रतिबंधित या असुरक्षित रंगों का इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।
मिठाइयों पर लगा चांदी का वर्क भी जांच का विषय हो सकता है। कई बार असली चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉयल इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं।
हाल ही में दिल्ली के चांदनी चौक, नरेला, ओखला और नारायणा की कुछ दुकानों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आने की जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, मिठाइयों के पास खुले कूड़ेदान, कीड़े-मकोड़े और कर्मचारियों की स्वच्छता में लापरवाही जैसी स्थितियां मिलीं।
मिठाई खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- बहुत ज्यादा चमकीले या असामान्य रंग वाली मिठाइयां खरीदने से बचें।
- मिठाई में खट्टी या अजीब गंध आए तो उसे न खाएं।
- फफूंद लगी या खराब दिखने वाली मिठाई से दूर रहें।
- पैक मिठाई खरीदते समय निर्माण और एक्सपायरी की तारीख जरूर देखें।
- दुकानदार से खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का लाइसेंस नंबर जांचें।
- साफ-सुथरी जगह पर रखी और ढकी हुई मिठाइयां ही खरीदें।
मिलावट या खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायत के लिए FSSAI के 'Food Safety Connect' ऐप या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दूषित या अस्वच्छ तरीके से तैयार मिठाई खाने से साल्मोनेला, ई. कोलाई और नोरोवायरस जैसे रोगाणुओं के संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसके लक्षण कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। इसमें पानी जैसे दस्त, पेट में ऐंठन, जी मिचलाना, उल्टी, बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हल्के मामलों में पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देने से सुधार हो सकता है। हालांकि, लक्षण गंभीर होने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
फूड पॉइजनिंग के कुछ लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
- उल्टी या मल में खून आना।
- तेज बुखार होना।
- लगातार उल्टियां होना और पानी तक पेट में न टिक पाना।
- पेशाब कम होना, मुंह सूखना, बहुत प्यास लगना या खड़े होने पर चक्कर आना।
- धुंधला या दोहरा दिखाई देना, मांसपेशियों में कमजोरी, झुनझुनी या बोलने और निगलने में परेशानी होना।
- दस्त तीन दिनों से ज्यादा समय तक जारी रहना या हालत में सुधार न होना।
खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में फूड पॉइजनिंग को हल्के में नहीं लेना चाहिए। दिवाली की खुशियों के बीच मिठाइयों की खरीदारी में सावधानी बरतें, ताकि त्योहार का स्वाद सेहत पर भारी न पड़े।

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